भखार न्यूज नेटवर्क: एमसीबी जिले के शिक्षा विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कमरो ने आरोप लगाया कि एमसीबी और कोरिया के स्थानीय, योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों और अधिकारियों की अनदेखी करते हुए सूरजपुर जिले से जुड़े अधिकारियों को लगातार महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ किया जा रहा है।
पूर्व विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि “आखिर स्थानीय योग्य शिक्षकों और अधिकारियों का हक क्यों छीना जा रहा है? सूरजपुर से अधिकारियों को एमसीबी और कोरिया लाकर सरकार किसे लाभ पहुंचाना चाहती है?”
एमसीबी शिक्षा विभाग में पदस्थापना पर सियासी भूचाल!
एक के बाद एक पदस्थापना पर सवाल
गुलाब कमरो ने शिक्षा विभाग में अलग-अलग पदों पर हुई पदस्थापनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा, वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी तथा विभिन्न विकासखंडों में पदस्थ अधिकारियों के संबंध में सूरजपुर जिले से जुड़े होने की बातें सामने आ रही हैं।
उन्होंने विशेष रूप से सोनहत, मनेन्द्रगढ़, खड़गवां और जनकपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कमरो का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर योग्य और अनुभवी अधिकारी उपलब्ध हैं, तो फिर दूसरे जिले से अधिकारियों को लाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
“नियमों के तहत पदस्थापना या फिर लेनदेन?”
पूर्व विधायक ने पदस्थापना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इन नियुक्तियों और पदस्थापनाओं में नियमों का पालन किया जा रहा है या फिर भाजपा सरकार के कार्यकाल में लेनदेन के आधार पर पद दिए जा रहे हैं?
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग और अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
“क्या सूरजपुर का प्रभाव एमसीबी से ज्यादा?”
गुलाब कमरो ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या एमसीबी जिले में सूरजपुर के मंत्री का प्रभाव एमसीबी के मंत्री से ज्यादा चल रहा है?
उन्होंने मांग की कि शिक्षा विभाग में हुई पदस्थापनाओं की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति किन नियमों, पात्रताओं और प्रशासनिक आधार पर की गई है।
स्थानीय शिक्षकों को मिले समान अवसर
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पदस्थापना प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्थानीय योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों-अधिकारियों को समान अवसर और नियमों के पालन की मांग की है।
अब सवाल यह है कि शिक्षा विभाग इन आरोपों और सवालों पर क्या जवाब देता है? क्या पदस्थापनाओं की समीक्षा होगी या फिर मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहेगा?