एमसीबी/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के वन विभाग के कुंवारपुर वन परिक्षेत्र को लेकर लगातार सामने आ रहे अलग-अलग आरोपों ने एक बार फिर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुंवारपुर वन परिक्षेत्र के डिप्टी पर अलग-अलग मामलों को लेकर आरोप सामने आते रहे हैं और इन मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग भी उठती रही है।

मीडिया में इन मामलों से जुड़ी खबरें लगातार प्रकाशित होने के बाद अब मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच पहुंचता दिखाई दे रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, डिप्टी द्वारा प्रकाशित खबरों को झूठा एवं भ्रामक बताए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, खबर प्रकाशित करने वाले पर पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने की भी चर्चा है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है— डिप्टी द्वारा लगाए गए पैसे मांगने के आरोपों के कहां हैं प्रमाण?
यदि डिप्टी द्वारा किसी पत्रकार पर पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है, तो सवाल उठता है कि क्या इस आरोप के समर्थन में कोई रिकॉर्डिंग, संदेश, वीडियो या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं?
यदि प्रमाण मौजूद हैं, तो उन्हें नाम के साथ सार्वजनिक किया जाए ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके वहीं जांच में यदि पैसे मांगने की बात प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्यवाही भी हो
वहीं, यदि जांच में डिप्टी द्वारा लगाए गए पैसे मांगने के आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो झूठे आरोप लगाए जाने के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई हो
खबरें गलत हैं तो प्रमाणों की जांच क्यों नहीं?
दूसरी ओर, यदि मीडिया में प्रकाशित खबरों को झूठा और भ्रामक बताया जा रहा है, तो उन खबरों में सामने रखे गए दस्तावेजों, वीडियो, तस्वीरों और अन्य प्रमाणों की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही क्या जिम्मेदार अधिकारियों को भी मिली भगत है…. ?
क्यों कि खबर में साफ सबूत समाने दिखाई दे रहे उसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों मामले की जाँच करने से बच रहे है…?
किसी खबर को केवल गलत या भ्रामक बताने के बजाय उसके तथ्यों की जांच होने से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि खबर में लगाए गए आरोपों का आधार कितना सही है।
सिर्फ बयान नहीं… अब जांच से सामने आए सच!
एक तरफ कुंवारपुर वन परिक्षेत्र के डिप्टी पर अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रकाशित खबरों को गलत बताते हुए खबर प्रकाशित करने वाले पर पैसे मांगने जैसे आरोप लगाए जाने की बात सामने आ रही है।
ऐसे में किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय निष्पक्ष और सक्षम स्तर की जांच ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है।
नए अधिकारियों के बाद क्या खुलेगी पुरानी फाइल?
एमसीबी जिले में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों में बदलाव के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या कुंवारपुर वन परिक्षेत्र से जुड़े पुराने आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा होगी?
- क्या सामने आए दस्तावेजों और वीडियो की जांच होगी?
- क्या डिप्टी पर लगाए गए आरोपों की जांच होगी?
- और यदि पत्रकार पर पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं, तो क्या उन आरोपों के प्रमाण भी जांच के दायरे में आएंगे?
इन तमाम सवालों के बीच अब निगाहें वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
सवाल कई हैं… आरोप गंभीर हैं… दावे भी सामने हैं। अब जरूरत सिर्फ ऐसी निष्पक्ष जांच की है, जिससे आरोप, दावे और वास्तविक सच्चाई के बीच का अंतर स्पष्ट हो सके।
