एमसीबी/जनकपुर
भखार न्यूज नेटवर्क:- एमसीबी जिले के जनकपुर स्थित वन विभाग के काष्ठागार (डिपो) में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि यहां सरकारी रिकॉर्ड, खासकर ट्रांजिट परमिट (TP) में छेड़छाड़ के गंभीर मामले सामने आए हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई के बजाय सिर्फ ट्रांसफर कर मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, काष्ठागार में लंबे समय से गड़बड़ियों का सिलसिला जारी है।
लकड़ी के आवागमन से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी कर नियमों की अनदेखी की जा रही है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर सख्त कदम उठाने के बजाय औपचारिक कार्रवाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।
बड़े अधिकारियों पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में अब जिले के शीर्ष अधिकारी—DFO और CCF—की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि बिना उच्च स्तर की जानकारी के इस तरह की गड़बड़ियां संभव नहीं हैं।
जांच टीम पर भी संदेह

मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन किया गया था, लेकिन अब इस जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
ट्रांसफर ही सजा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराध के लिए सिर्फ ट्रांसफर ही सजा है? यदि ऐसा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनकपुर काष्ठागार का मामला अब सिर्फ एक डिपो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा।