शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: सालभर सिस्टम सोता रहा, अब बच्चों की सेहत दांव पर क्यों?
एमसीबी/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज़ नेटवर्क: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले का प्रदेश में सबसे खराब प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। लगातार दूसरे साल जिले का रिजल्ट निचले पायदान पर पहुंचा, लेकिन पूरे सत्र में न तो मॉनिटरिंग मजबूत हुई और न ही कमजोर छात्रों के लिए कोई ठोस रणनीति दिखाई दी।
अब जब रिजल्ट ने शिक्षा विभाग की पोल खोल दी, तो सुधार के नाम पर भीषण गर्मी में छात्रों को स्कूल बुलाने के फैसले पर विवाद शुरू हो गया है।
16 जून से पहले स्कूल खोलने पर बवाल

राज्य शासन ने गर्मी और लू को देखते हुए स्कूल 16 जून से खोलने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद जिले में पूरक और अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए सुबह 7 से 10 बजे तक स्कूल संचालन के निर्देश जारी किए गए हैं।
अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि जब पूरक परीक्षा अभी दूर है, तब इतनी गर्मी में बच्चों को बुलाना उनकी सेहत के साथ जोखिम भरा कदम है।
“इवेंटबाजी” में उलझा शिक्षा विभाग?
शिक्षकों के अनुसार पूरे सत्र में पढ़ाई और स्कूल मॉनिटरिंग की बजाय बैठकों, कार्यक्रमों और दिखावटी गतिविधियों पर ज्यादा जोर दिया गया।
कमजोर विद्यार्थियों की पहचान, नियमित अकादमिक समीक्षा और विषयवार तैयारी पर अपेक्षित काम नहीं हुआ, जिसका असर सीधे बोर्ड परिणाम में दिखाई दिया।
प्रश्न बैंक बना “फेल फार्मूला”?
शिक्षकों का आरोप है कि विभागीय प्रश्न बैंक को लेकर इतना दबाव बनाया गया कि छात्र उसी पर निर्भर हो गए। लेकिन मुख्य परीक्षा में उससे बहुत कम प्रश्न आने से विद्यार्थियों को बड़ा नुकसान हुआ।
शिक्षकों का कहना है कि मेहनत में कमी नहीं थी, लेकिन रणनीति गलत साबित हुई।

पढ़ाई कम, गैर-शैक्षणिक काम ज्यादा
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि सालभर उन्हें विभिन्न प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रखा गया। इस कारण कमजोर छात्रों पर अलग से ध्यान नहीं दिया जा सका।
पालकों की उदासीनता भी वजह
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार आज भी बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा घरेलू काम और खेती-किसानी को प्राथमिकता देते हैं। शिक्षा को लेकर जागरूकता की कमी भी खराब परिणाम की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
अब सवाल—जिम्मेदार कौन?
लगातार खराब रिजल्ट के बाद अब शिक्षा विभाग, प्रशासन, शिक्षक व्यवस्था और पालकों—सभी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब दोषारोपण छोड़कर जमीनी सुधार की जरूरत है।
क्या होना चाहिए?
- शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए
- कमजोर छात्रों के लिए अलग अकादमिक प्लान बने
- स्कूलों की वास्तविक मॉनिटरिंग हो
- दिखावटी कार्यक्रमों की बजाय पढ़ाई पर फोकस बढ़े
- भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिले
- वरना MCB जिला शिक्षा के इस “कलंक” से बाहर नहीं निकल पाएगा।