जनकपुर/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनकपुर स्थित वन विभाग काष्ठागार (डिपो) से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां लकड़ी की चोरी, अवैध बिक्री और सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों ने पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में बड़ा खुलासा — एक लॉट लकड़ी कम
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी की जांच में एक पूरी लॉट लकड़ी कम पाई गई है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि लंबे समय से यहां अवैध तरीके से लकड़ी की बिक्री का खेल चल रहा था।
TP के हिसाब से 58 नग लकड़ी ज्यादा — बड़ा खेल?

मामले में यह भी सामने आया है कि ट्रक की अनलोडिंग के बाद TP (ट्रांजिट पास) के अनुसार 58 नग लकड़ी ज्यादा पाई गई। आरोप है कि इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए बाद में रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई।
रिश्तेदारों और बच्चों के खातों में पैसा ट्रांसफर?
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल में शामिल कर्मचारियों और ठेकेदारों द्वारा पैसों का लेन-देन सीधे उनके रिश्तेदारों और बच्चों के खातों में किया जाता था, ताकि जांच में पकड़ से बचा जा सके।
TP में छेड़छाड़ की पुष्टि, फिर भी नहीं FIR

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में सरकारी दस्तावेज TP में छेड़छाड़ सही पाए जाने के बावजूद अब तक किसी भी दोषी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है और न ही कोई सख्त कार्रवाई हुई है।
कार्यवाही के नाम पर सिर्फ सिर्फ झूठा आश्वासन?
मीडिया में लगातार खबरें सामने आने के बाद भी विभाग द्वारा केवल ट्रांसफर जैसी कार्रवाई की बात सामने आ रही है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं बड़े स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश तो नहीं हो रही।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
- आखिर दोषियों को बचाने की कोशिश क्यों?
- क्यों दी जा रही है “तारीख पर तारीख”?
- क्या बड़े अधिकारियों की शह पर चल रहा है पूरा खेल?
- क्या सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ करने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी?
गहराई से जांच हुई तो सामने आ सकते हैं बड़े नाम
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जाए, तो कई बड़े अधिकारी और ठेकेदारों के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे यह मामला और भी बड़ा घोटाला बन सकता है।