जनता की जान के साथ खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग मौन, जिम्मेदार कौन.?


एमसीबी/कोरिया/ छत्तीसगढ़

भखार न्यूज नेटवर्क : छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद से विभाग में बड़े-बड़े घोटालों की भरमार हो गई है।

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर में सलाइन ड्रिप लगाने के बाद 7 मरीजों की हालत बिगड़ गई। मरीज पेट में दर्द, बुखार और दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। जिन्हें इलाज के लिए भर्ती किया गया था। लेकिन, आईवी फ्लुड-आरएल और आईवी फ्लुड डीएनएस चढ़ाए जाने के दौरान मरीजों को कंपकपी (सिवरिंग) होने लगी। 27 जुलाई से 7 अगस्त तक लगातार इस तरह के केस सामने आते रहे।

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इन 12 दिनों में सलाइन लगाने से 8 मरीजों ने कंपकपी की शिकायत की। डॉक्टर्स द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की पड़ताल में इसका खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) द्वारा भेजी गई दवाइयों के उपयोग के बाद मरीजों को कंपकपी हुई है। इस घटना के बाद ड्यूटी डॉक्टर ने 1 अगस्त को RL और 8 अगस्त को DNS के संबंध में सीजीएमएससी को जानकारी दी। शिकायत के बाद पूरे प्रदेश में इस बैच की दवाइयों के उपयोग पर अस्थाई रोक लगा दी गई है। साथ ही दवाइयों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।

जनता की जान के साथ खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग मौन, जिम्मेदार कौन.?

 

CGMSC के माध्यम से गुणवत्ता विहीन चिकित्सा सामग्री और ऑपरेशन टूल्स स्वास्थ्य केंद्रों तक भेजे जा रहे हैं, जिसकी शिकायतें डॉक्टर और स्टाफ नर्स स्वयं कर रहे हैं, लेकिन विभाग पूरी तरह मौन है। सवाल उठता है – इस चुप्पी के पीछे आखिर कौन है?

 

मरीजों की जान पर सीधा खतरा

जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजी गई आईसो प्लस–RL और DNS सलाईन से मरीजों में कंपकपी की शिकायत।

 

महासमुंद मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाले सर्जिकल ब्लेड जंग लगे और खराब पाए गए।

 

90 बैच की दवाओं पर शिकायतें, कई टैबलेट्स पर फंगस जमा मिला।

 

सप्लाई करने वाली कंपनी – 9 एम इंडिया लिमिटेड।

 

छोटे-बड़े अस्पतालों से लगातार अलग-अलग बैच की गुणवत्ता पर सवाल।

 

सबसे खतरनाक – पैरासिटामोल भी खराब

 

पैरासिटामोल जैसी सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा भी खराब पाई गई, जो सीधे-सीधे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

 

बिना परीक्षण भेजी जा रही दवाएं :

पूर्व विधायक का कहना है कि गुणवत्ता विहीन, बिना पूर्व परीक्षण के पूरे प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों में दवाएं और सर्जिकल सामग्रियां भेजी जा रही हैं। यह प्रदेश की जनता की जान के साथ खिलवाड़ है।

क्या स्वास्थ्य मंत्री अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या विभागीय मिलीभगत से यह खेल चलता रहेगा?


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