वन संपदा पर डाका: बिहारपुर से बड़गांवकला तक माफिया का साम्राज्य, विभाग की चुप्पी सवालों में


एमसीबी/ छत्तीसगढ़ 

भखार न्यूज नेटवर्क : छत्तीसगढ़ मनेंद्रगढ़ स्थित वन मंडल में इन दिनों अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी का संगठित खेल चरम पर है। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, बेशकीमती सागौन, साल और अन्य प्रजातियों के पेड़ों को रात के अंधेरे में काटकर सुबह होने से पहले ही जंगल से बाहर पार कर दिया जाता है।

आरोप है कि शिकायतों के बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता तस्करों के हौसले बुलंद कर रही है। जंगलों में बड़े-बड़े ठूंठ इस बात के गवाह हैं कि कटाई कोई छोटी-मोटी नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से की जा रही है। हॉटस्पॉट बने ये इलाके

बिहारपुर : तस्करों का ‘खुला बाजार’

WhatsApp Group Join Now
Instagram Group Join Now

ग्रामीणों का कहना है कि यहां जंगल के भीतर दर्जनों स्थानों पर ताजा कटे पेड़ों के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। रात के समय छोटे पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लकड़ी मुख्य सड़कों तक पहुंचाई जाती है, फिर बड़े ट्रकों में लोड कर बाहर भेज दी जाती है।

सोनहरी : घने जंगलों की आड़

सोनहरी के घने जंगल तस्करों के लिए सुरक्षित ढाल बन चुके हैं। रात में मशीनों और आरी की आवाज आम हो गई है। कई बार लकड़ी को अस्थायी डंप में छिपाकर एक साथ बाहर भेजा जाता है।

बड़गांवकला : अंदरूनी नेटवर्क सक्रिय

यहां जंगल के भीतर अस्थायी आरा मशीनें चलने की चर्चा है। कटाई के बाद लकड़ी को पास के गांवों में छिपाकर रखा जाता है और फिर रात के समय खपाया जाता है।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मौखिक शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों का दावा है कि कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की उदासीनता या संभावित मिलीभगत के कारण यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हालांकि, विभागीय स्तर पर इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यदि आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ वन संपदा की लूट नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व और पर्यावरण सुरक्षा तंत्र की भी बड़ी विफलता है।

पर्यावरण पर मंडराता बड़ा संकट

अंधाधुंध कटाई के दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं वर्षा चक्र और जल स्रोतों पर असर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का विनाश स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका पर संकट क्षेत्रीय जलवायु असंतुलन विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र पारिस्थितिक असंतुलन का गंभीर शिकार हो सकता है।

जनता में आक्रोश, विशेष जांच की मांग

सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

विशेष संयुक्त जांच दल गठित हो

संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की जांच हो

नियमित रात्रि गश्त और चेकपोस्ट निगरानी बढ़ाई जाए

जब्त लकड़ियों की सार्वजनिक जानकारी जारी की जाए

क्या टूटेगी ‘कुंभकर्णी नींद’?

अब सवाल यही है—क्या प्रशासन तस्करों पर नकेल कसेगा या जंगलों की यह लूट यूं ही जारी रहेगी?

मनेंद्रगढ़ के जंगल सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति और पारिस्थितिकी की धरोहर हैं। यदि अभी भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो नुकसान अपूरणीय होगा।


Avatar

Phone: 919424248344 Email: contact.bhakarnews@gmail.com

Leave a Comment