एमसीबी जिले का वन विभाग फिर सवालों के घेरे में..!
क्या एक ही डिप्टी साहब चला रहे पूरे वन विभाग का कारोबार..?
एमसीबी/कुंवारपुर
भखार न्यूज नेटवर्क : एमसीबी जिले का वन विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। वन परिक्षेत्र कुंवारपुर अंतर्गत 20 जून 2026 को नीलगिरी (यूकेलिप्टस) लकड़ी से लदी ट्रक क्रमांक MP 18 ZB 9978 को कथित तौर पर पकड़ा गया था, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही उसे छोड़ दिए जाने की चर्चा पूरे क्षेत्र में जोरों पर है।

जानकारी के अनुसार ट्रक चालक के पास न तो वैध परिवहन दस्तावेज थे और न ही दूसरे राज्य में लकड़ी परिवहन के लिए आवश्यक ट्रांजिट पास (टीपी)। इतना ही नहीं, वन विभाग का आवश्यक सत्यापन भी उपलब्ध नहीं था। पूछताछ में चालक द्वारा लकड़ी को मध्यप्रदेश ले जाने की बात कही गई थी।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब न तो वन विभाग का सत्यापन था और न ही दूसरे राज्य में परिवहन के लिए आवश्यक दस्तावेज, तो आखिर किस आधार पर ट्रक को छोड़ दिया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में वाहन की जब्ती कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन यहां मामला कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है।

खसरा दस्तावेजों में भी बड़ा खेल..?
मामले में पंचायत द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि खसरा क्रमांक 92/2 की फोटोकॉपी में फसल के रूप में “यूकेलिप्टस (नीलगिरी) 100” अंकित दिखाई दे रहा है,

जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसी खसरा क्रमांक पर फसल का विवरण “निरंक” दर्शाया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उपलब्ध फोटोकॉपी में स्पष्ट रूप से “ओवर कलेक्शन” किया गया दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ही खसरा रिकॉर्ड में इतना बड़ा अंतर कैसे दिखाई दे रहा है? क्या दस्तावेजों में कोई हेरफेर की गई है या फिर रिकॉर्ड में कोई बड़ा खेल चल रहा है? यह जांच का विषय बन गया है।
किसके संरक्षण में चल रहा खेल..?
यदि दस्तावेज अधूरे थे, सत्यापन नहीं था और दूसरे राज्य में परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति भी नहीं थी, तो फिर ट्रक को छोड़ने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया? आखिर किस अधिकारी ने वाहन को मुक्त करने की अनुमति दी?

वन विभाग द्वारा ट्रक को कुछ समय के लिए पकड़कर बाद में छोड़ दिया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्षेत्र में चर्चा है कि विभाग के भीतर किसी प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। यही वजह है कि गंभीर अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई का परिणाम शून्य नजर आ रहा है।
विवादों में रहने वाले डिप्टी साहब पर फिर उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार कुंवारपुर रेंज के एक डिप्टी साहब जहां-जहां पदस्थ रहे हैं, वहां किसी न किसी विवाद को लेकर चर्चा में रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके संरक्षण में संरक्षित वन क्षेत्र से अवैध रेत उत्खनन और लकड़ी तस्करी करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
ट्रक छोड़े जाने के इस पूरे मामले के बाद एक बार फिर उन्हीं पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारी ऐसे कर्मचारियों पर मेहरबान क्यों हैं?
बड़ा सवाल
- – बिना वन विभागीय सत्यापन के लकड़ी परिवहन कैसे हो रहा था?
- – दूसरे राज्य में परिवहन के लिए आवश्यक टीपी नहीं थी तो वाहन को क्यों छोड़ा गया?
- – खसरा रिकॉर्ड और ऑनलाइन रिकॉर्ड में अंतर क्यों है?
- – ट्रक को छोड़ने का आदेश किस अधिकारी ने दिया?
- – क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
- – आखिर जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर मौन क्यों हैं?
ट्रक पकड़ी गई, दस्तावेज अधूरे मिले, सत्यापन नहीं था, टीपी नहीं थी… फिर भी वाहन छोड़ दिया गया। आखिर किसके इशारे पर और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है?