जनकपुर/एमसीबी
भखार न्यूज नेटवर्क: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के कुंवारपुर वन विभाग परिक्षेत्र के एक डिप्टी पर लगातार गंभीर आरोप लगते रहे हैं।, हैरानी की बात यह है कि ये डिप्टी साहब जहां भी रहे, सुर्खियों में रहे, अब फिर से एक के बाद एक विवाद सामने आने के बावजूद अब तक न तो कोई स्पष्ट कार्रवाई दिखाई दी और न ही विभाग के जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक जवाब सामने आया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

सबसे पहले डिप्टी अधिकारी का नाम कथित अवैध रेत के कारोबार और वन क्षेत्र में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में आया। इसके बाद लकड़ी तस्करी और वन संपदा की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। अब समय बीताने के साथ आरोपों का दायरा और बढ़ता गया तथा अब उन पर जंगल की जमीन को कथित रूप से बेचने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। एक राष्ट्रपति दत्तक पुत्र माने जाने वाले बैगा जाति की एक महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि ₹17,000 रुपया लेकर जंगल की जमीन का सौदा किया गया.?,

लगातार सामने आ रहे इन आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप निराधार हैं, तो विभाग को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि आरोपों में सच्चाई है, तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी संबंधित अधिकारी अपने पद पर बने हुए हैं। इससे विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। लोगों का मानना है कि निष्पक्ष जांच होने पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
अब जिले के जिम्मेदार अधिकारियों, वरिष्ठ वन अधिकारियों और प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस पूरे मामले पर अपना पक्ष सार्वजनिक करें तथा यदि आवश्यक हो तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाएं। जब तक आरोपों पर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती, तब तक सवाल उठते रहेंगे कि आखिर गंभीर आरोपों से घिरे इस डिप्टी अधिकारी पर जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं?