कुंवारपुर वन परिक्षेत्र के डिप्टी साहब फिर विवादों में, पहले रेत, फिर लकड़ी तस्करी, अब वन विभाग की जमीन बेचने का आरोप,आखिर हर बार वही नाम क्यों, जिले के जिम्मेदार अधिकारी के चुप्पी पर उठे सवाल


एमसीबी/मनेंद्रगढ़/जनकपुर

भखार न्यूज नेटवर्क: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में पदस्थ एक डिप्टी रेंजर का नाम एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। पिछले कुछ महीनों से लगातार अलग-अलग मामलों में विवादों में रहे इस डिप्टी पर अब वन विभाग की जमीन का सौदा करने का आरोप लगा है।

आरोप है कि राष्ट्रपति दत्तक पुत्र (विशेष पिछड़ी जनजाति) समुदाय की एक महिला से 17 हजार रुपये लेकर जंगल की जमीन का सौदा किया गया। महिला ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि वन भूमि से जुड़े गंभीर अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है।

यह पहला मौका नहीं है जब कुंवारपुर वन परिक्षेत्र के इस डिप्टी साहब का नाम विवादों में आया हो।

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इससे पहले क्षेत्र में अवैध रेत के कारोबार को लेकर भी सवाल उठे थे। उस दौरान आरोप लगे थे डिप्टी साहब के कहने से ही संरक्षित जंगल से रेत निकला जा रहा

और जब डिप्टी साहब से इस मामले पर बात की गई तो उसका कहना था कि पत्रकारों के विडियो फोटो का कोई महत्व ही नहीं है.?,लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही करने के बजाए चुप्पी साध के बैठे है?

इसके बाद 20 जून को अवैध लकड़ी तस्करी का मामला सामने आया, बिना वैध दस्तावेज के नीलगिरी लकड़ी से भरी ट्रक पकड़ी गई जो अवैध परिवहन कर रहा था जिसके पास न तो परिवहन के लिए TP था और ना ही वन विभाग का सत्यापन लेकिन ड्राइवर के पास खसरे की फोटो कॉपी थी उसमें भी ओवर करेक्शन था उसके बाद भी आखिर कैसी जाँच हुई और उसे छोड़ दिया गया उस प्रकरण में भी विभागीय कार्यवाही और जिम्मेदारी तय करने को लेकर कई सवाल उठे थे, लेकिन आज तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई।

अब सबसे बड़ा सवाल की आखिर जिले के जिम्मेदार इस तरह के अवैध लकड़ी तस्करी मामले में क्यों चुप्पी साधे हुए हैं अब जिले के जिम्मेदार आधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है।

इतना ही नहीं अब लगातार बार बार उसी डिप्टी का नाम नए विवाद में सामने आने से पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर हर बार एक ही डिप्टी का नाम क्यों सामने आ रहा है? यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा? और यदि आरोपों में सच्चाई है तो अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल—

  • आखिर एक ही डिप्टी साहब बार-बार विवादों में क्यों?
  • क्या लगातार मिल रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी?
  • जिले के जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
  • क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण इन मामलों में कार्रवाई की राह रोक रहा है?
  • या फिर पूरे मामले में विभागीय स्तर पर भी जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है?

 

(नोट: यह खबर ग्रामीण और सूत्रों के आधार पर लगाए आरोपों पर प्रकाशित की जा रही है। संबंधित अधिकारी या वन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


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