एमसीबी/भरतपुर
भखार न्यूज नेटवर्क: विकासखंड भरतपुर के बालक छात्रावासों में अधीक्षकों की हालिया पदस्थापना को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति सुखमंती सिंह ने पदस्थापना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि नियुक्तियां नियमों की अनदेखी कर की गई हैं। उन्होंने सहायक आयुक्त कार्यालय और स्थानीय बीईओ पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया है तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भरतपुर छात्रावासों में पोस्टिंग का ‘खेल’!
प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सुखमंती सिंह ने कहा कि छात्रावास अधीक्षक का पद अत्यंत संवेदनशील होता है, क्योंकि आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन, शिक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी अधीक्षक पर होती है। उनका आरोप है कि योग्य और स्थानीय शिक्षकों को प्राथमिकता देने के बजाय दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को अधीक्षक बना दिया गया, जिससे छात्र हित प्रभावित हो रहे हैं।
पदस्थापना पर लगाए गए प्रमुख आरोप
- कई ऐसे शिक्षकों को अधीक्षक बनाया गया है जिनका निवास या पदस्थ स्थान छात्रावास से 50 से 80 किलोमीटर दूर है, जिससे नियमित उपस्थिति और रात्रि प्रवास संभव नहीं है।
- नियुक्ति प्रक्रिया में न तो जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों और न ही पालकों की राय ली गई।
- सहायक आयुक्त कार्यालय और बीईओ के बीच मिलीभगत कर कथित रूप से सिफारिश वाले शिक्षकों को प्राथमिकता दी गई।
- अधीक्षकों की अनुपस्थिति के कारण छात्रावासों में भोजन, पेयजल, रात्रि निगरानी और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने का आरोप लगाया गया है।
सुखमंती सिंह ने कहा कि यह मामला केवल पदस्थापना का नहीं, बल्कि आदिवासी और गरीब विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर आवासीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, लेकिन अधिकारियों की मनमानी से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ये हैं प्रमुख मांगें
- भरतपुर विकासखंड में हुई सभी अधीक्षक पदस्थापनाओं की तत्काल समीक्षा कर उन्हें निरस्त किया जाए।
- पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति स्थानीय शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की सहमति से की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो जिला पंचायत सदस्य, पालक और ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर आंदोलन करेंगे।
नोट: यह खबर जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति सुखमंती सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।