“भव्य आयोजन की जगह छोटा कार्यक्रम… आदिवासी मुख्यमंत्री पर भी उठाए सवाल”
मनेंद्रगढ़ /छत्तीसगढ़
भखार न्यूज़ नेटवर्क: बिरसा मुंडा जयंती पर आयोजित “जनजातीय गौरव दिवस” को लेकर जिले में राजनीतिक माहौल गरम हो गया है।
इमली गोलाई परिसर में हुए इस सरकारी कार्यक्रम को पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने “औपचारिकता मात्र” करार देते हुए प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जनजातीय गौरव दिवस पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ :
गुलाब कमरों ने कहा कि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पूर्णतः आदिवासी बहुल जिला है, ऐसे में बिरसा मुंडा जयंती जैसे ऐतिहासिक दिवस का आयोजन भव्य और प्रभावशाली तरीके से होना चाहिए था।
उन्होंने कहा —
“यह प्रदेश का बड़ा कार्यक्रम है। इसे स्वामी आत्मानंद स्कूल ग्राउंड या आमखेरवा ग्राउंड जैसे बड़े मैदान में किया जाना चाहिए था। लेकिन सरकार ने इसे छोटे स्तर पर आयोजित कर केवल खानापूर्ति की है।”
“आदिवासी मुख्यमंत्री है… फिर भी जनजातीय कार्यक्रमों में कंजूसी!”
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकार जनजातीय समाज के कार्यक्रमों में कंजूसी बरत रही है।
“विश्व आदिवासी दिवस पहले ही बंद कर दिया गया, अब ‘जनजातीय गौरव दिवस’ को भी औपचारिक बना दिया गया है। यह जनजातीय समाज की भावनाओं के साथ अन्याय है।”
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा जैसे महानायक केवल जनजातीय नायक नहीं, बल्कि स्वाभिमान, संघर्ष और स्वतंत्रता के प्रतीक हैं, ऐसे महापुरुष की जयंती को सीमित संसाधनों में आयोजित करना समाज के प्रति असम्मान है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी उठाए सवाल

गुलाब कमरों ने कहा —
“जब पूरा जिला आदिवासी इलाका है, तो कार्यक्रम की भव्यता क्यों घटाई गई? क्या जनजातीय समाज की भावनाएँ सिर्फ़ भाषणों तक ही सीमित रहेंगी?”
उनके इस बयान के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
जनजातीय समाज के कई लोगों ने भी बड़े और प्रभावशाली आयोजन की अपेक्षा जताई है।