जनकपुर/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: एमसीबी जिले के जनकपुर काष्ठागार (डिपो) में वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से लकड़ी की हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि लॉट से अधिक लकड़ी चोरी-छिपे ट्रक में लोड कर रवाना करने की कोशिश की जा रही थी और जब मामला उजागर हुआ तो सरकारी दस्तावेज टीपी (ट्रांजिट पास) में ही छेड़छाड़ कर कर्मचारियों और ठेकेदार को बचाने का प्रयास किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार डिपो से लकड़ी ले जाने वाले एक ट्रक में टीपी के मुताबिक 150 नग लकड़ी होना चाहिए था, लेकिन जब जांच की मांग उठी और ट्रक को खाली करवाया गया तो उसमें से 208 नग लकड़ी निकली। यानी 58 नग लकड़ी अधिक पाई गई।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का खुलासा वहीं के कुछ छोटे कर्मचारियों ने किया। उन्होंने ट्रक में लॉट से अधिक लकड़ी लोड होने का विरोध किया और ट्रक को गेट पर ही रोक दिया।

इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने गेट पर ताला लगाकर ट्रक को बाहर जाने से रोक दिया और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी कि जब तक जांच नहीं होगी, ट्रक नहीं जाने दिया जाएगा।

धमकाने के आरोप
सूत्रों के अनुसार, जब छोटे कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति जताई तो डिपो के ही कुछ बड़े कर्मचारियों ने उन्हें धमकाया और कहा कि
“तुम अपना काम करो, हम जो कर रहे हैं उससे तुम्हारा कोई मतलब नहीं। अगर यह बात बाहर गई तो नौकरी से निकलवा देंगे।”
मीडिया पहुंची तो बढ़ा मामला
मामले की भनक मीडिया तक पहुंची तो पत्रकार मौके पर पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद बाबू और कर्मचारियों ने मीडिया को फोटो और वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की।
इस बीच जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों ने ट्रक को ऊपर-ऊपर देखकर ही यह कह दिया कि जांच कर ली गई है और सब कुछ ठीक है।
लेकिन जब मीडिया और कर्मचारियों ने ट्रक को खाली करवाकर जांच की मांग की, तब सच्चाई सामने आ गई और ट्रक से 58 नग लकड़ी ज्यादा निकली।

ठेकेदार ने भी मानी बात
सूत्रों के मुताबिक, लकड़ी ले जा रहे ठेकेदार ने भी स्वीकार किया कि ट्रक में टीपी से अधिक लकड़ी लोड है। इसके बावजूद जांच करने वाले अधिकारी पहले इस बात को दबाने की कोशिश करते रहे।
TP दिखाने में आनाकानी
मीडिया द्वारा जब ट्रांजिट पास (TP) दिखाने की मांग की गई तो जांच अधिकारी काफी देर तक उसे दिखाने से बचते रहे। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद मीडिया को TP दिखाई गई।
सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ का आरोप

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि जिस TP में पहले 150 नग लकड़ी दर्ज थी,
उसमें बाद में छेड़छाड़ के संकेत दिखाई दिए।
सवाल उठ रहा है कि सरकारी दस्तावेज में इस तरह की छेड़छाड़ किसके आदेश पर और किसने की?
कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि ट्रक से अधिक लकड़ी मिलने के बावजूद जांच करने आए अधिकारियों ने न तो ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई की और न ही इस खेल में शामिल कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई की गई।
अब पूरे मामले को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं—
- आखिर TP में छेड़छाड़ किसने की?
- ट्रक में ज्यादा लकड़ी मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या इस पूरे मामले में वन विभाग का पूरा सिस्टम ही शामिल है?
- क्या जांच करने वाले अधिकारी भी इस खेल का हिस्सा हैं?
वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले का खुलासा करने वाले छोटे कर्मचारियों को अब कथित तौर पर धमकियां दी जा रही हैं कि उन्होंने बाहर जानकारी क्यों दी।
अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच होती है या नहीं और दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।