भखार न्यूज नेटवर्क: मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग जहां नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कर उनके हित में प्रयासरत है, वहीं भरतपुर विकासखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों में भारी लापरवाही सामने आ रही है।

जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मनमानी खुलेआम देखने को मिल रही है। निर्धारित समय सुबह 9:30 से दोपहर 3:30 बजे तक केंद्र खुलने का नियम है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई केंद्रों पर ताले लटकते मिलते हैं या कार्यकर्ता मनमाने समय पर आते-जाते हैं।
कैमरा के सामने से भागी कार्यकर्ता:
आंगनबाड़ी केंद्र ओदरा गड़ई में कार्यकर्ता अनूपा यादव दोपहर 12 बजे पहुंचीं। पूछताछ करने पर उन्होंने कैमरे के सामने से बचने की कोशिश की।
वहीं नौढिया केंद्र में सहायिका सुकवरिया मौजूद तो थीं, लेकिन कार्यकर्ता नदारद थी
लेकिन सहायिका से गरम भोजनके बारे में में पूछताछ की गई तो सहायिका के द्वारा बताया गया कि —“बच्चे भाग गए।” इस लिए खाना नहीं बना है अब सवाल यह है बच्चे तो आंगनबाड़ी से भाग गए जबाव दार कौन….? बच्चों को घर से लेकर आना और वापस लेकर जाना आखिर किसकी जवाबदारी है क्यों कि कार्यकर्ता भी अपने मन से घर चली जाती है आखिर सहायिका खाना बनाएं या बच्चों को देखे……यदि छोटे बच्चे केंद्र से बाहर भागकर किसी दुर्घटना का शिकार होते हैं तो जिम्मेदारी कौन लेगा..?
समय से पहले आंगनबाड़ी केंद्र से कार्यकर्ता गायब:
आंगनबाड़ी केंद्र डोम्हरा पटेल पारा में तो कार्यकर्ता दोपहर 12:30 बजे ही केंद्र से चली गईं। यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
निरीक्षण का अभाव :
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की आंगनबाड़ी केंद्रों पर संबंधित विभाग का कोई अधिकारी निरीक्षण करने के लिए नहीं आता है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्रों पर पदस्थ कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं। वहीं इनके द्वारा बच्चों को खाने के लिए पोषण आहार नहीं बनाया जा रहा है।