धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार, गुलाब कमरों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र – किसानों के हक की उठी आवाज


मनेन्द्रगढ़/भरतपुर

भखार न्यूज नेटवर्क: जिला एमसीबी एवं कोरिया के धान खरीदी उपार्जन केंद्रों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर भरतपुर–सोनहत विधानसभा के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

 

पूर्व विधायक कमरों ने पत्र में कहा है कि वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन चुकी है। यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। वास्तव में,

 

WhatsApp Group Join Now
Instagram Group Join Now
  • धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार के चलते कई किसान चिंतित हैं।

 

  • धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार को लेकर किसानों की चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं, और इसका प्रभाव उनकी जिंदगी पर बहुत बड़ा है।

 

  • धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इस स्थिति को सुधारना अत्यंत आवश्यक है।

 

  • धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार के कारण किसान परेशान हैं।

 

धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार: किसानों की समस्याएँ

धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार की समस्या को समझना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि उपार्जन केंद्रों में प्रतिदिन खरीदी की लिमिट तय किए जाने से किसानों को भारी भीड़ और लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसानों को 20–20 दिनों तक टोकन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे छोटे एवं मध्यम किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

 

उन्होंने प्रतिदिन की खरीदी सीमा समाप्त करने की मांग की है। पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि सर्वर की धीमी गति और मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण एग्रीटेक पंजीयन पोर्टल पर पंजीयन नहीं हो पा रहा है। बड़ी संख्या में किसान आज भी पंजीयन से वंचित हैं। इसे देखते हुए उन्होंने धान पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।इसलिए, धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार की स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

 

गुलाब कमरों ने सरकार के घोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का वादा किया गया था, लेकिन वास्तविकता में केवल 16–17 क्विंटल प्रति एकड़ ही खरीदा जा रहा है, जो किसानों के साथ अन्याय है।उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से धान खरीदी नहीं की जा रही, जिससे आदिवासी एवं वनवासी किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
समर्थन मूल्य को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र में 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का वादा किया गया था, लेकिन वर्तमान में किसानों को केवल 2369 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार के चलते कई किसान निराश हैं।इसके अलावा उपार्जन केंद्रों में हमाली का पैसा किसानों से वसूला जाना भी गंभीर समस्या बताया गया है, जबकि यह खर्च शासन या संबंधित एजेंसियों द्वारा वहन किया जाना चाहिए।

 

पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि किसानों की इन सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी किए जाएं, ताकि धान खरीदी व्यवस्था सुचारू हो और किसानों को उनका पूरा अधिकार मिल सके। इस संदर्भ में, धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार को समाप्त करने की दिशा में एक ठोस योजना बनानी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ती लागत से परेशान हैं, ऐसे में खरीदी व्यवस्था की खामियां उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।
पूर्व विधायक ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री किसानों की पीड़ा को समझते हुए शीघ्र ठोस निर्णय लेंगे। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो धान खरीदी केंद्रों में हाहाकार और बढ़ सकता है।


Avatar

Phone: 919424248344 Email: contact.bhakarnews@gmail.com

Leave a Comment