CMHO अविनाश खरे पर रेडक्रॉस से ब्लड बैंक तक घोटालों की बरसात, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई नहीं तो राजधानी में धरना


मनेंद्रगढ़/छत्तीसगढ़

भखार न्यूज नेटवर्क: एमसीबी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। राज्यपाल के नाम भेजे गए विस्तृत शिकायत पत्र में CMHO पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, नियम विरुद्ध नियुक्तियां, फर्जी भुगतान, स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल करने और रेडक्रॉस सोसायटी की गतिविधियों में कथित गड़बड़ियों समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी को वर्ष 2024 में प्राप्त मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) का वास्तविक संचालन अगस्त 2025 में शुरू हुआ, लेकिन इससे पहले ही मई 2025 से फर्जी संचालन दिखाकर डीजल और अन्य मदों में भुगतान निकाल लिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति ही नहीं हुई थी, उनके नाम पर संचालन दर्शाया गया और एक ऐसे व्यक्ति को भी भुगतान किया गया, जिसने कथित तौर पर MMU या रेडक्रॉस में कभी काम ही नहीं किया।

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शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि मनेन्द्रगढ़ स्थित शोभा ब्लड बैंक में खून मनमाने दाम पर उपलब्ध कराया जाता है और इसकी शिकायत CMHO से किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही एड्स जागरूकता अभियान के नाम पर बाहरी कलाकारों से सीमित काम कराकर फर्जी तरीके से राशि आहरित करने तथा स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया गया है।

220 बिस्तर अस्पताल मनेन्द्रगढ़, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केल्हारी और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल व्यवस्था का जिम्मेदार भी शिकायत में CMHO को ठहराया गया है। आरोप है कि स्टाफ और उपकरणों की भारी कमी के बावजूद व्यवस्था सुधारने के बजाय नियम विरुद्ध संलग्नीकरण किए गए और कई स्थानों पर अयोग्य तरीके से प्रभार सौंपे गए।

 

शिकायत में यह भी कहा गया है कि विभाग में नियमों के विपरीत खरीदारी कर फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान निकाला गया, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद किसी प्रकार की जांच नहीं कराई गई। सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

सबसे गंभीर आरोपों में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2019 में बिलासपुर में पदस्थापना के दौरान रिश्वत प्रकरण में जेल जाने और जमानत के लिए कथित रूप से गलत दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के मामले की भी आज तक जांच नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिले के कुछ डॉक्टर मरीजों को जानबूझकर निजी अस्पतालों में भेजते हैं, जबकि उनका इलाज सरकारी अस्पताल में संभव होता है। 220 बिस्तर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ के अक्सर अनुपस्थित रहने और इससे मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करने के लिए मजबूर होने का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के आवासों में अपात्र लोगों को रहने देने और इसके बदले कथित रूप से रकम लेने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

 

शिकायतकर्ता ने राज्यपाल से मांग की है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर एक माह के भीतर CMHO के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें जिले से हटाया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो 18 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे रायपुर स्थित रेडक्रॉस भवन के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

 

नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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