एमसीबी जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

वर्षों से जमीन का सबसे प्रमाणिक दस्तावेज़ मानी जाने वाली “किसान किताब” को कलेक्टर साहब द्वारा मान्यता न देने की बात सामने आने के बाद इलाके में जबरदस्त नाराज़गी है।

पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने भी इस मुद्दे पर खुलकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि किसान किताब दशकों से जमीन, फसल, स्वामित्व और राजस्व संबंधी प्रमाणिक दस्तावेज़ रही है। ऐसे में इसे अमान्य बताना किसानों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
किसानों के तगड़े सवाल…
“जब किसान किताब वर्षों से प्रमाणिक है, तो अचानक यह अमान्य कैसे हो गई?”
“क्या यही प्रशासनिक न्याय है?”
“क्या यही सुशासन का मॉडल है?”
“अगर प्रशासन पुराने प्रमाण ही न माने, तो किसान किस दस्तावेज़ पर भरोसा करे?”

किसानों का कहना है कि उनकी जमीन से जुड़े विवादों और पट्टा संबंधी मामलों में किसान किताब ही प्रमुख आधार रही है। अब यदि प्रशासन इसे ही न माने तो आम नागरिकों का अधिकार खतरे में पड़ सकता है।
पूरा मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने प्रशासन से इस निर्णय की स्पष्ट वजह बताने और किसानों के हित में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।