डबरी निर्माण में बड़ा खेल! मजदूरों के हक पर डाका,कुंवारपुर वनपरिक्षेत्र में निजी JCB-ट्रैक्टर से निर्माण कर खुद को आर्थिक लाभ पहुंचा रहे प्रभारी डिप्टी ? आरोप


एमसीबी/मनेंद्रगढ़

भखार न्यूज नेटवर्क: वनमंडल मनेंद्रगढ़ के कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में डबरी निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्य में मजदूरों से काम कराने के बजाय मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही JCB और ट्रैक्टर कथित तौर पर उसी वन परिक्षेत्र में पदस्थ प्रभारी डिप्टी के बताए जा रहे हैं।

मामले में संबंधित मशीनों के ड्राइवरों द्वारा भी कथित तौर पर बताया गया है कि JCB और ट्रैक्टर प्रभारी डिप्टी के हैं। यदि यह जानकारी सही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रभारी डिप्टी अपने ही विभाग के क्षेत्र में डबरी निर्माण कार्य के लिए अपनी निजी मशीनें लगाकर आर्थिक लाभ ले रहे हैं?

आखिर सरकारी डबरी निर्माण में एक कर्मचारी की निजी मशीनें किस आधार पर लगाई जा रही हैं? मशीनें लगाने की अनुमति किसने दी? इनके इस्तेमाल के बदले भुगतान किसे किया जा रहा है? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी है?

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डबरी निर्माण या निजी मशीनों से कमाई का खेल?

 

कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में डबरी निर्माण के दौरान निजी मशीनों के इस्तेमाल के आरोप ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि JCB और ट्रैक्टर वास्तव में प्रभारी डिप्टी के हैं और उन्हीं के पदस्थापना क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है।

 

निष्पक्ष जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मशीनों का वास्तविक मालिक कौन है? किस अधिकारी ने मशीनों के इस्तेमाल की अनुमति दी? निर्माण कार्य में मशीनों के उपयोग का भुगतान किसके खाते में किया जा रहा है? कहीं विभागीय पद पर रहते हुए निजी संसाधनों के जरिए स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाने का मामला तो नहीं है?

 

मजदूरों का रोजगार छीनकर मशीनों को काम? गरीबों के हक पर सवाल!

 

डबरी निर्माण कार्य में मशीनों के इस्तेमाल के साथ स्थानीय मजदूरों के रोजगार का मुद्दा भी उठ रहा है। आरोप है कि जिस काम को स्थानीय मजदूरों से कराया जा सकता था, उसमें JCB और ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

ऐसे में सवाल है कि स्थानीय मजदूरों को रोजगार क्यों नहीं दिया गया? क्या निर्माण कार्य में मजदूरों को प्राथमिकता देने से जुड़े नियमों का पालन किया गया? आखिर जिन गरीब मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने चाहिए, उनका काम मशीनों को क्यों दिया जा रहा है?

 

यदि आरोप सही हैं तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

 

पहले भी कई गंभीर आरोपों से चर्चा में रहे प्रभारी डिप्टी, महामहिम राज्यपाल तक पहुंची शिकायत!

कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में पदस्थ प्रभारी डिप्टी को लेकर यह पहला विवाद नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में कई गंभीर आरोप लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

 

बताया जा रहा है कि प्रभारी डिप्टी पर पूर्व में लगे विभिन्न आरोपों और उन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर शिकायतकर्ताओं ने एमसीबी कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी।

अब सवाल यह है कि पूर्व में की गई उस शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या प्रभारी डिप्टी पर लगाए गए पुराने आरोपों की जांच कराई गई? क्या संबंधित अधिकारियों ने जांच पूरी कर ली है या शिकायत अब भी कार्रवाई के इंतजार में है?

गौरतलब है कि राज्यपाल के समक्ष की गई शिकायत प्रभारी डिप्टी पर पूर्व में लगे आरोपों से संबंधित है।हालांकि, पुराने आरोपों के बीच अब डबरी निर्माण में निजी मशीनों के इस्तेमाल के ताजा आरोपों ने एक बार फिर उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं रात के अंधेरे में उसी ट्रैक्टर और जेसीबी से लकड़ी तस्करी का भी वीडियो वायरल हो रहा बता दे कि सूत्रों से मिली सूचना के अधार पर की रात के अंधेरे में लकड़ी तस्करी की जाती है जब इस सूचना पर खबर एकत्र करने पहुंचे पत्रकारों ने मौके पर वीडियो फोटो बनाना शुरू किया उसी दौरान पत्रकारों के ऊपर लकड़ी से भरा ट्रैक्टर भी ऊपर चढ़ाने की कोशिश की गई.! 

 

प्रभारी डिप्टी की संपत्ति की जांच क्यों नहीं? आय के स्रोतों पर उठे सवाल

 

डबरी निर्माण में कथित तौर पर अपनी ही JCB और ट्रैक्टर लगाए जाने के आरोपों के बाद अब प्रभारी डिप्टी की संपत्ति और आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है। सवाल है कि आखिर एक छोटे सरकारी कर्मचारी के पास इतनी बड़ी मशीनें और संसाधन कहां से आए? मांग की जा रही है कि संबंधित प्रभारी डिप्टी की चल-अचल संपत्ति, आय के स्रोतों, JCB और ट्रैक्टर के वास्तविक स्वामित्व तथा मशीनों की खरीद से संबंधित दस्तावेजों की नियमानुसार जांच कराई जाए। साथ ही पुराने मामलों की भी जाँच निष्पक्ष की जाए

साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि क्या विभागीय पद पर रहते हुए निजी मशीनों को अपने ही क्षेत्र के निर्माण कार्य में लगाकर किसी प्रकार का आर्थिक लाभ लिया जा रहा है?

 

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जवाब देंगे या फिर मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?

  • – क्या डबरी निर्माण में प्रभारी डिप्टी की निजी JCB और ट्रैक्टर का इस्तेमाल हो रहा है?
  • – क्या मशीनों के इस्तेमाल से प्रभारी डिप्टी को आर्थिक लाभ पहुंच रहा है?
  • – मशीनों के इस्तेमाल की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
  • – मजदूरों के बजाय मशीनों से काम कराने के पीछे क्या वजह है?
  • – प्रभारी डिप्टी पर पूर्व में लगे आरोपों की जांच के लिए राज्यपाल के समक्ष की गई शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
  • – क्या प्रभारी डिप्टी की संपत्ति और आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच होगी?

इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच होने से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। अब देखना होगा कि मनेंद्रगढ़ वनमंडल के वरिष्ठ अधिकारी इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या संबंधित प्रभारी डिप्टी से जवाब तलब किया जाता है?

 

क्योंकि सवाल सिर्फ एक डबरी के निर्माण का नहीं है, बल्कि सरकारी काम में निजी मशीनों के कथित इस्तेमाल, गरीब मजदूरों के रोजगार और विभागीय पद पर बैठे कर्मचारी के संभावित निजी हितों का भी है।

 

 

नोट: खबर में उल्लेखित बातें प्राप्त जानकारी एवं शिकायतों में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। JCB और ट्रैक्टर के स्वामित्व तथा ड्राइवरों के कथित बयानों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। राज्यपाल के समक्ष की गई पुरानी शिकायत वर्तमान डबरी निर्माण मामले से अलग है। संबंधित प्रभारी डिप्टी एवं वन विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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