मनेंद्रगढ़/एमसीबी
भखार न्यूज नेटवर्क: छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के ग्राम मेंड्रा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्मित सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 2 करोड़ 60 लाख 89 हजार रुपये की लागत से बनी 5.5 किलोमीटर लंबी सड़क और पुलिया की हालत ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवालिया निशान लगा दिया है। पहली बारिश में सड़क के क्षतिग्रस्त होने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को लेकर सरकार को घेरा है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखने की बात कही है।

करोड़ों खर्च, फिर भी सड़क की हालत खराब!
ग्राम मेंड्रा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क और पुलिया का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना पर करीब 2 करोड़ 60 लाख 89 हजार रुपये खर्च किए गए। लेकिन सड़क की मौजूदा स्थिति ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों का समुचित ध्यान नहीं रखा गया। यही वजह है कि सड़क बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई और अब लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी में संभावित लापरवाही की ओर इशारा करता है। ऐसे में निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जांच के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
जांच के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क क्षतिग्रस्त होने के पीछे निर्माण संबंधी खामियां जिम्मेदार हैं या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी अथवा प्राकृतिक कारण है।

डॉ. चरणदास महंत ने सरकार को घेरा
सड़क की स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने के लिए पत्र लिखने की बात कही है।
करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क के क्षतिग्रस्त होने के मामले ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की निगाहें जांच पर टिकी हैं। ग्रामीणों की मांग है कि यदि निर्माण में गड़बड़ी या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

- 2 करोड़ 60 लाख 89 हजार रुपये की लागत से बनी सड़क बारिश में क्षतिग्रस्त कैसे हुई?
- क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन किया गया था?
- क्या सड़क निर्माण के बाद विभागीय अधिकारियों ने गुणवत्ता की जांच की थी?
- सड़क की दुर्दशा के लिए निर्माण में खामी जिम्मेदार है या भारी बारिश और अन्य तकनीकी कारण?
- जांच में यदि अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
ग्राम मेंड्रा की यह सड़क अब केवल आवागमन का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन गई है। एक ओर स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के निर्देश दिए हैं, तो दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में सड़क की खराब हालत की असली वजह क्या सामने आती है और यदि निर्माण में गड़बड़ी साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होगी?