जनकपुर/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: जनकपुर में इन दिनों दिनदहाड़े भालू की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के रिहायशी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भालू के नजर आने के बावजूद स्थिति को लेकर जिम्मेदार विभाग की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि भालू को देखकर लोग सुरक्षित दूरी बनाने के बजाय उसके बेहद करीब पहुंच रहे हैं। कोई वीडियो बना रहा है तो कोई उसे बिस्किट खिलाकर रोमांच लेने में जुटा है। लेकिन यही लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बन रही है जब भालू स्कूल के आसपास और बच्चों की आवाजाही वाले इलाकों में नजर आ रहा है। कभी स्कूल के सामने भालू दिखाई देता है तो कभी स्कूल की छुट्टी के समय सड़क और भीड़भाड़ वाले इलाके में उसकी मौजूदगी देखने को मिल रही है।

सोचिए, अगर स्कूल की छुट्टी के वक्त भालू अचानक किसी बच्चे, शिक्षक या राहगीर पर हमला कर दे तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
वन्यजीव का व्यवहार कभी भी अचानक बदल सकता है। आज लोग उसे देखने और बिस्किट खिलाने के लिए भीड़ लगा रहे हैं, लेकिन कल यही लापरवाही किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकती है।
सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर है—
जब शहर में बार-बार भालू दिखाई दे रहा है, लोगों की भीड़ उसके करीब पहुंच रही है और स्कूलों के आसपास तक उसकी मौजूदगी सामने आ रही है, तो वन विभाग की ओर से सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
- क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
- क्या किसी अप्रिय घटना के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी?
- आखिर लोगों की जान खतरे में पड़ने के बाद ही विभाग जागेगा या हादसे से पहले कोई कार्रवाई होगी?
और सबसे अहम—भालू को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर जंगल की ओर भेजने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है?
जनकपुर में भालू अब कौतूहल का विषय नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा चिंता बन चुका है। वन विभाग को समय रहते सक्रिय होकर लोगों को सुरक्षित रखने और भालू को रेस्क्यू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक भालू का नहीं है… सवाल है कि किसी मासूम के साथ हादसा होने से पहले जिम्मेदार विभाग जागेगा या हादसे के बाद?