जनकपुर/एमसीबी
भखार न्यूज नेटवर्क: रोझी-केल्हारी क्षेत्र में हुए बस हादसे के बाद अब जनकपुर पुलिस ने क्षेत्र में संचालित बसों की सघन जांच शुरू कर दी है। पुलिस की इस पहल को यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम माना जा रहा है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच परिवहन विभाग की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।

जब बसों की जांच की जिम्मेदारी से जुड़ा परिवहन विभाग मौजूद है, तो नियमित जांच का काम आखिर कौन कर रहा था?
हादसे के बाद पुलिस सड़क पर, परिवहन विभाग की जांच कहां?
बस हादसे के बाद जनकपुर पुलिस द्वारा बसों की जांच करना सराहनीय पहल है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का सक्रिय होना जरूरी है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या बसों की जांच केवल हादसा होने के बाद ही होगी? हादसे से पहले क्या क्षेत्र में संचालित बसों की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों की नियमित जांच की जा रही थी?
फिलहाल बसों की सघन जांच जनकपुर पुलिस कर रही है। ऐसे में परिवहन विभाग की ओर से नियमित जांच को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।

विभाग की ओर से जांच की जा रही है या नहीं, इस संबंध में भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
पुलिस का काम सराहनीय, लेकिन जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस की नहीं!
जनकपुर पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया जाना चाहिए। सड़क पर चलने वाले वाहनों की जांच और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन बसों की फिटनेस और परिवहन संबंधी नियमों के अनुपालन की नियमित निगरानी में परिवहन विभाग की भूमिका भी अहम है।
आखिर यात्रियों की जान से जुड़ा मामला है। बसों की जांच केवल हादसे के बाद कुछ दिनों तक चलने वाला अभियान नहीं, बल्कि नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए। बसों की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक के लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की समय-समय पर जांच जरूरी है।
परिवहन विभाग से सीधे सवाल!
- – क्या रोजी-केल्हारी क्षेत्र में बसों की नियमित जांच की जा रही थी?
- – अगर जांच हो रही थी, तो उसकी जानकारी और कार्रवाई का रिकॉर्ड क्या है?
- – क्या परिवहन विभाग हादसे के बाद नियमित जांच अभियान चलाएगा?
- – क्या बसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी?
इन सवालों का जवाब परिवहन विभाग को देना चाहिए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
अब देखना होगा, जांच कितने दिन चलेगी!
जनकपुर पुलिस की मौजूदा कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि यह अभियान लगातार जारी रहे और परिवहन विभाग भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए नियमित जांच सुनिश्चित करे। हादसे के बाद सक्रियता दिखाना जरूरी है, लेकिन असली उद्देश्य हादसों को रोकना होना चाहिए।
जनहित का सवाल: क्या बसों की जांच सिर्फ हादसे के बाद ही होगी, या परिवहन विभाग अब नियमित जांच की जिम्मेदारी भी गंभीरता से निभाएगा?
यात्रियों की सुरक्षा किसी एक दिन के अभियान से नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और नियमों के पालन से सुनिश्चित होगी।