सावरकर पर सवाल पूछना पड़ा भारी! शिक्षक सस्पेंड, शैक्षिक महासंघ ने खोला मोर्चा—“निलंबन तत्काल वापस लो”


रायपुर/छत्तीसगढ़

भखार न्यूज नेटवर्क: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय इकाई ने सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। महासंघ ने केरल के कासरगोड जिले के कुंबला सब-डिस्ट्रिक्ट में आयोजित विद्यालयी सामाजिक विज्ञान प्रश्नोत्तरी में विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने पर शिक्षक गुरु प्रसाद के निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग की।

सावरकर पर सवाल पूछना पड़ा भारी! शिक्षक सस्पेंड, शैक्षिक महासंघ ने खोला मोर्चा—“निलंबन तत्काल वापस लो”

 

महासंघ के इकाई अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए दंड और अंडमान की सेलुलर जेल में कारावास का अध्ययन इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सावरकर पर प्रश्न पूछना न अपराध है और न अनुशासनहीनता। किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के विचारों से सहमति या असहमति अलग विषय है, लेकिन किसी व्यक्ति को इतिहास से बाहर नहीं किया जा सकता।

 

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इकाई की उपाध्यक्ष डॉ. आकांक्षा दुबे ने कहा कि यदि प्रश्नावली उप जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर अनुमोदित होकर विद्यालयों में भेजी गई थी, तो किसी कथित त्रुटि के लिए केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने प्रश्न तैयार करने, उसके स्रोत, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की।

 

महासंघ ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले निलंबन जैसी कार्रवाई से शिक्षक समुदाय में भय और आत्म-सेंसरशिप का माहौल बन सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों को राजनीतिक दबाव से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों को प्रश्न करने, तर्क करने, प्रमाणों की जांच करने और विभिन्न ऐतिहासिक दृष्टिकोणों को समझने के लिए प्रेरित कर सकें।

 

महासंघ ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं है। गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक, श्री अरविंद और सावरकर सहित अनेक व्यक्तित्वों के योगदान से स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक गाथा बनी है। ऐसे में विद्यार्थियों को स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं और प्रमुख व्यक्तित्वों का तथ्य आधारित एवं समग्र अध्ययन कराया जाना चाहिए।

 

ज्ञापन में महासंघ ने यह भी उल्लेख किया कि स्वतंत्र भारत में विभिन्न सरकारों और राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा सावरकर को ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में सार्वजनिक जीवन में स्थान दिया गया है। महासंघ ने सवाल उठाया कि ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न को विद्यालयी क्विज में शामिल करना गंभीर शैक्षिक अपराध कैसे माना जा सकता है।

 

महासंघ ने स्पष्ट किया कि प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं को इतिहास से हटाने के बजाय उन्हें तथ्यों, प्रमाणों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। संगठन ने  गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लेकर सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

 

इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रांत संयोजक प्रो. आर. डी. शर्मा, डॉ. कपिल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक सदस्य उपस्थित रहे।


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