भरतपुर/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: कैलाश मंदिर मेला क्षेत्र में दुकानों की जगह को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। मेले में बाहरी जिलों एवं दूर-दराज से पहुंचे दुकानदारों के साथ खुलेआम धोखाधड़ी किए जाने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग एक दुकान के नाम पर 5 से 10 टेंट की जगह पर कब्जा कर रहे हैं और फिर मजबूरी का फायदा उठाकर उसी जगह को 3 हजार से 5 हजार रुपये तक में ब्लैक में बेच रहे हैं।
नियम-कानून ताक पर दुकानों की जगह को लेकर अवैध वसूली:
दूर-दूर से आए दुकानदार मजबूरी में महंगे दामों पर दुकान लगाने को विवश हैं। इससे मेले में अव्यवस्था का माहौल बन गया है और आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। नियमों को ताक पर रखकर यह पूरा खेल चल रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मेला प्रशासन और जनपद पंचायत द्वारा नियम बनाए गए हैं, तो फिर यह अवैध वसूली कैसे हो रही है? क्या यह सब जिम्मेदारों की मिलीभगत से हो रहा है?
नेता ने प्रशासन को ठहराया विफल
एक स्थानीय नेता ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि
“प्रशासन पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। जो नियम बनाए गए, उन्हीं पर कायम नहीं रहा जा सका। आबंटन के बाद मार्किंग की बात हुई थी, लेकिन रात में बाहरी व्यापारियों को जहां जगह मिले वहां टेंट लगाने की छूट दे दी गई। रातों-रात पूरा नक्शा-खसरा बदल गया, यहां तक कि रास्तों तक पर कब्जा हो गया। मेला स्थल पर गिने-चुने प्रशासनिक लोग ही मौजूद रहे। व्यवस्था का काम हफ्ते भर पहले दुरुस्त किया जाना चाहिए था, लेकिन बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया गया। फिलहाल सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।”
ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
वहीं एक ग्रामीण ने कहा कि
“जिसने मेला में दुकान खरीदकर ली है, उसे तत्काल मेला से हटाया जाए, ताकि सभी को सबक मिले। साथ ही दुकान बेचने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।”
अब बड़ा सवाल यह है कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन इस अवैध वसूली और बिचौलियों के खेल पर क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर गरीब दुकानदारों के साथ यह अन्याय यूं ही जारी रहेगा।