जनकपुर / पतवाही
“रक्षक ही जब भक्षक बन जाए…”
यह कहावत आज कुंवारपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पतवाही में पूरी तरह चरितार्थ होती नज़र आ रही है।
संरक्षित जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस वन विभाग पर है, वही विभाग अब अवैध रेत उत्खनन और भंडारण के गंभीर आरोपों में घिरता दिखाई दे रहा है। सामने आए वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग ने विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया टीम जब मौके पर पहुँची, तो पाया गया कि
संरक्षित वन क्षेत्र से ट्रैक्टरों के माध्यम से खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा था।
वन विभाग की मिलीभगत से उजड़ रहा संरक्षित जंगल..! :
जब इस दौरान फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए गए, तो ट्रैक्टर चालक घबरा गया और उसने ट्रैक्टर मालिक को फोन लगाया। फोन कॉल के दौरान जो बातचीत सामने आई, उसने पूरे मामले की परतें खोल दीं।
कॉल रिकॉर्डिंग में ट्रैक्टर मालिक का चौंकाने वाला बयान
ट्रैक्टर मालिक फोन पर कहता है
“डिप्टी साहब रामायण शर्मा से बात हो गई है, उन्होंने कहा है सुबह निकाल लेना दिन में मत निकलना।”
यह बयान सीधे-सीधे वन विभाग की कथित मिलीभगत की ओर इशारा करता है और विभाग की भूमिका को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

एक व्यक्ति को खुली छूट?
ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे इलाके में
सिर्फ एक ही व्यक्ति को अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की खुली छूट दी गई है। आरोप है कि शिवपाल यादव, जिसे पेशे से शिक्षक बताया जा रहा है, संरक्षित जंगल से खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन और भंडारण कर रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते और देखते हुए भी आँख मूंदे बैठे हैं।
बड़े नेता की छत्रछाया के भी आरोप
सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे किसी बड़े नेता की कथित छत्रछाया बताई जा रही है, जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
सवालों के घेरे में वन विभाग
क्या संरक्षित जंगलों की सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?
क्या वनकर्मियों की मिलीभगत से चल रहा है रेत माफियाओं का खेल?
क्या कॉल रिकॉर्डिंग के बाद भी होगी निष्पक्ष जांच?
अब देखने वाली बात यह होगी कि
उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले में संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।