एक के बाद एक मामलों से बढ़े सवाल, जंगल की निगरानी व्यवस्था पर उठ रही उंगलियां
एमसीबी/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के कुंवारपुर वन परिक्षेत्र से एक के बाद एक मामले सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और जंगल की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जहाँ कुंवारपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पतवाही के संरक्षित जंगल के अंदर धान की फसल की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर वन विभाग की जिम्मेदारी और जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ग्राम पतवाही क्षेत्र में संरक्षित जंगल के अंदर धान की फसल लगाई गई है। जिसने वन भूमि की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, खेती की वास्तविक स्थिति, भूमि का वन रिकॉर्ड तथा संबंधित व्यक्ति के पास किसी प्रकार की वैध अनुमति है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

एक के बाद एक सामने आ रहे मामले

कुंवारपुर वन परिक्षेत्र पिछले कुछ समय से अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। इससे पहले संरक्षित जंगल से कथित अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया था। जिसमें रेत उत्खनन करवा रहे ट्रैक्टर मालिक ने संबंधित डिप्टी का नाम भी बताया इसके बाद मामला और गरमा गया फिर जंगल की जमीन को पैसे लेकर सौदा किए जाने के आरोप भी सामने आए।

वहीं एक ऐसा मामला जिसमें ₹6,000 लिए जाने और ₹5,000 की रसीद दिए जाने के आरोप लगाए गए थे।, अवैध लकड़ी परिवहन कर रहे ट्रक बिना वैद्य दस्तावेज के परिवहन करने वाले ट्रक को छोड़ने पर भी सवाल खड़े हुए जिसमें ट्रक ड्राइवर के पास ना तो वेद दस्तावेज थे और ना ही वन विभाग का सत्यापन ट्रक ड्राइवर के पास एक खसरा नंबर का फोटो कॉपी था जिसमें फोटो कॉपी में फसल का नाम यूकेलिप्टस हो रहा था वही इस खसरा नंबर का ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक करने पर फसल का नाम निरंक शो हो रहा था

आखिर वन विभाग ने ट्रक को पड़कर क्या जांच की क्यों की उपलब्ध दस्तावेज में ओवर कलेक्शन दिखाई दे रहा और जब इन सभी मामलों की लगातार मीडिया पर लगातार खबर प्रकाशित की गई तो तिलमिलाए डिप्टी ने ऐसा बयान दिया कि वन विभाग के सिस्टम पर ही सवाल खड़े हो गए डिप्टी साहब ने कहा कि मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार है और इनके द्वारा कई बार पैसे की भी मांग की गई है.?
आखिर बिना जांच किसी भी प्रकाशित खबर को कैसे झूठा बताया जा सकता है..?

जिसके बाद मामला और भी गर्मा गया अगर सच में खबर झूठी और भ्रामक निराधार है तो इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए साथ ही अगर सच में किसी पत्रकार ने पैसे मांगे हैं तो संबंधित डिप्टी द्वारा सबूत के साथ प्रमाण भी सामने लाने चाहिए ताकि जाँच के बाद उनपर कार्यवाही हो सके लेकिन आखिर आरोप झूठे निकलते है तो पैसे मांगने के आरोप लगाने वाले पर भी नियम अनुसार कार्यवाही होनी चाहिए
इन सभी मामलों के बाद अब पतवाही के संरक्षित जंगल में धान की खेती का मामला सामने आने से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल उठ रहे हैं।
डिप्टी पर लगे आरोपों की जांच का भी इंतजार
कुंवारपुर वन परिक्षेत्र मे पूर्व में भी विभिन्न मामलों को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं। इन आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठती रही है। अब नए जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने यह सवाल है कि पूर्व में सामने आए आरोपों और वर्तमान मामले की जांच किस स्तर पर की जाती है।
नए अधिकारियों से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब लोगों की नजर जिले के नए जिम्मेदार वन अधिकारियों पर है। सवाल यह है कि क्या पतवाही में संरक्षित जंगल के अंदर खेती किए जाने के मामले की स्थल जांच कराई जाएगी? क्या वन भूमि का रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा? और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी?
फिलहाल मामले में वन विभाग की आधिकारिक जांच और पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

