भागवानपुर/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और आम जनता को राहत देने के दावे करती है, वहीं एमसीबी जिले के भरतपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत भागवानपुर से सामने आई एक रसीद ने ग्रामीणों पर लगाए जा रहे करों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सामर्थ पंचायत पोर्टल की इस रसीद में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹100 का Property/House Tax वसूला गया है। यानी अब ग्रामीण परिवारों को अपने घर-संपत्ति के लिए भी पंचायत को कर देना पड़ रहा है। और अगर यही सिलसिला चलता रहा तो जनता मजाक में यह पूछने पर मजबूर हो जाएगी—
“अगली बार सड़क पर पैदल चलने का टैक्स लगेगा क्या?”
“सुबह उठकर खुली हवा में सांस लेने का भी कोई नया टैक्स आने वाला है क्या?”
सवाल यह है कि पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे ग्रामीणों से लगातार अलग-अलग प्रकार के कर वसूले जा रहे हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें मूलभूत सुविधाएं कितनी मिल रही हैं?
टैक्स लिया जा रहा है, सुविधाएं कब मिलेंगी?
ग्रामीण इलाकों में सड़क, नाली, पानी, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार की कर वसूली व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या सरकार और पंचायतों की प्राथमिकता केवल टैक्स वसूली तक सीमित रह गई है?
क्या ग्रामीणों से लिए जा रहे इस पैसे का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से विकास कार्यों में हो रहा है?
यह ₹100 की रसीद भले ही छोटी राशि दिखाई दे, लेकिन सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें आम ग्रामीण से कर तो लिया जा रहा है, मगर उसके बदले मिलने वाली सुविधाओं और राशि के उपयोग का हिसाब जनता को कितना बताया जा रहा है?
अब सरकार और पंचायत प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि ग्रामीणों से वसूले जा रहे संपत्ति कर की राशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया जाएगा