आत्मानंद स्कूल के नाम पर ₹1.32 करोड़ का DMF घोटाला! कागजों में विकास, मौके पर निर्माण गायब? तत्कालीन CEO समेत 9 पर FIR दर्ज


भखार न्यूज नेटवर्क: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अम्बिकापुर में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की राशि से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। केशवपुर स्थित शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर में विकास कार्यों के नाम पर स्वीकृत राशि के कथित दुरुपयोग के मामले में न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन जनपद पंचायत अम्बिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) समेत 9 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए भुगतान कराने और शासकीय राशि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

आत्मानंद स्कूल के नाम पर ₹1.32 करोड़ का DMF घोटाला! कागजों में विकास, मौके पर निर्माण गायब? तत्कालीन CEO समेत 9 पर FIR दर्ज

 

न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ मामला

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अम्बिकापुर निवासी अभय नारायण पाण्डेय ने इस मामले को लेकर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था।

 

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मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश गुलापन राम यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को मणिपुर थाना प्रभारी को मामला दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने 24 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 180/2026 के तहत नौ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

 

तीन विकास कार्यों के लिए स्वीकृत हुई थी ₹1.32 करोड़ की राशि

 

जानकारी के मुताबिक, केशवपुर स्थित आत्मानंद विद्यालय परिसर में तीन विकास कार्यों के लिए DMF मद से कुल 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे।

 

स्वीकृत कार्यों और उनकी राशि का विवरण इस प्रकार है:

 

  1. गार्डन का सौंदर्यीकरण एवं सीसी रोड निर्माण: 33 लाख 24 हजार रुपये।
  2.  प्रधान पाठक कक्ष, प्रसाधन एवं आहाता (बाउंड्रीवॉल) निर्माण: 49 लाख 57 हजार रुपये।
  3. प्रवेश द्वार (गेट) एवं पार्किंग शेड निर्माण: 49 लाख 52 हजार रुपये।

इन कार्यों के लिए स्वीकृत राशि और कथित भुगतान प्रक्रिया को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

फर्जी आईडी, बिल-वाउचर और दस्तावेजों से भुगतान कराने का आरोप

 

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि GeM पोर्टल पर कथित रूप से फर्जी आईडी तैयार की गई। इसके साथ ही प्रशासकीय स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया और नियमानुसार कार्य निष्पादन से संबंधित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना फर्जी बिल-वाउचर तथा मूल्यांकन प्रतिवेदन तैयार किए गए।

 

आरोपों के मुताबिक, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 1 अगस्त 2023 को मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन के पक्ष में RTGS के माध्यम से 48 लाख 36 हजार 544 रुपये का भुगतान किया गया।

 

इस भुगतान की प्रक्रिया, दस्तावेजों की सत्यता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका अब पुलिस जांच के दायरे में है।

 

कलेक्टर की जांच में मौके पर नहीं मिले निर्माण कार्य

 

मामले में सबसे गंभीर पहलू उस जांच रिपोर्ट को माना जा रहा है, जिसमें निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।

 

प्राप्त विवरण के अनुसार, जिला कलेक्टर द्वारा गठित विशेष जांच दल ने 7 अक्टूबर 2024 को मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया था। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान स्वीकृत निर्माण कार्य मौके पर नहीं मिले।

 

यदि जांच में स्वीकृत कार्यों के बिना भुगतान किए जाने और दस्तावेजों में हेराफेरी की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी धन के उपयोग और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला होगा।

 

तत्कालीन जनपद CEO समेत इन 9 आरोपियों के खिलाफ FIR

 

मणिपुर थाना पुलिस ने मामले में निम्नलिखित आरोपियों को नामजद किया है:

 

  1. सुरेश्वर नाथ तिवारी — तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत अम्बिकापुर।
  2.  विवेक प्रताप सिंह राठौर।
  3.  उपेन्द्र सिंह सेंगर।
  4. शैलेन्द्र मिश्रा।
  5.  राम प्रकाश यादव।
  6.  इम्तियाज सिंह।
  7. सुयश अग्रवाल।
  8. अरविंद कुमार अग्रवाल।
  9.  मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रेक्टर एंड सप्लायर्स।

 

पुलिस ने मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं, दस्तावेजों में हेराफेरी और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न आरोपों की जांच शुरू कर दी है।

 

इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ अपराध

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 201, 120-बी और 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

 

ये धाराएं आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, साक्ष्य छिपाने और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोपों से संबंधित हैं।

 

अब जांच में सामने आएगी जिम्मेदारों की भूमिका

 

DMF की राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना और जनहित से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करना है। ऐसे में यदि विकास कार्यों के नाम पर स्वीकृत राशि का दुरुपयोग या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

 

फिलहाल, मणिपुर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान भुगतान से जुड़े दस्तावेजों, GeM पोर्टल पर तैयार की गई आईडी, मूल्यांकन प्रतिवेदन, स्वीकृति प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

 

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। एफआईआर में नामजद होना अपने आप में किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता तथा संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय होगी।


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