एमसीबी/जनकपुर
भखार न्यूज नेटवर्क: छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ वनमंडल अंतर्गत कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पतवाही में डबरी निर्माण की आड़ में रात के अंधेरे में लकड़ी तस्करी का मामला सामने आया है। वीडियो में लकड़ी से भरा ट्रैक्टर दिखाई दे रहा है, जबकि उसके पास से JCB भी गुजरती नजर आ रही है। मौके पर मौजूद ट्रैक्टर चालक ने बातचीत के दौरान प्रभारी डिप्टी का नाम लेते हुए ट्रैक्टर और JCB को उनका बताया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रैक्टर और JCB पर नंबर प्लेट भी दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल किस आधार पर किया जा रहा था और इनकी पहचान तथा दस्तावेजों की जांच कौन करेगा?
जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की है, लेकिन अब उसी विभाग के एक प्रभारी डिप्टी का नाम लकड़ी से भरे ट्रैक्टर और JCB के संबंध में सामने आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर ग्राम पतवाही के जंगल में रात के अंधेरे में लकड़ी का परिवहन क्यों किया जा रहा था और इस पूरे मामले में किसकी जिम्मेदारी बनती है?
पहले रेत उत्खनन, फिर वनभूमि का मामला और अब लकड़ी तस्करी!
कुंवारपुर वन परिक्षेत्र पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। पहले संरक्षित जंगल में अवैध रेत उत्खनन को लेकर सवाल उठे। इसके बाद वनभूमि के सौदे को लेकर आरोप सामने आए। फिर अवैध लकड़ी परिवहन को लेकर सवाल खड़े हुए और अब ग्राम पतवाही में लकड़ी से भरे ट्रैक्टर का वीडियो सामने आया है।
इन अलग-अलग मामलों में प्रभारी डिप्टी का नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एक ही वन परिक्षेत्र में बार-बार ऐसे मामले क्यों सामने आ रहे हैं? क्या जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने इन मामलों की गंभीरता से जांच की है? यदि जांच हुई है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?
वीडियो में लकड़ी से भरा ट्रैक्टर, पास से गुजरती JCB; दोनों पर नंबर प्लेट नहीं!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पतवाही के जंगल में डबरी निर्माण कार्य के दौरान इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर और JCB के माध्यम से रात में लकड़ी परिवहन किए जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर जब मामले की पड़ताल की गई, तो लकड़ी से भरा ट्रैक्टर सामने आया।
वीडियो में ट्रैक्टर लकड़ी से भरा दिखाई दे रहा है और उसके पास से JCB भी गुजरती नजर आ रही है। दोनों वाहनों पर नंबर प्लेट दिखाई नहीं देने की बात भी सामने आई है। इसी दौरान ट्रैक्टर चालक ने प्रभारी डिप्टी का नाम लेते हुए ट्रैक्टर और JCB को उनका बताया।
जब पत्रकारों ने वीडियो और फोटो बनाने शुरू किए, तो आरोप है कि ट्रैक्टर चालक ने उनके ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि वीडियो बनते देखकर चालक ने ट्रैक्टर से लकड़ी गिराई और मौके से निकल गया।
मामले की सूचना थाना जनकपुर में दी गई है। अब पुलिस और वन विभाग की जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि लकड़ी कहां से लाई गई थी, उसके परिवहन की अनुमति थी या नहीं, ट्रैक्टर तथा JCB का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम पर है और वाहनों पर नंबर प्लेट क्यों नहीं थी।
गाड़ी किसी की भी हो, लकड़ी तस्करी पर हो सख्त कार्रवाई!
इस पूरे मामले में मांग है कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निष्पक्ष जांच कराएं। ट्रैक्टर और JCB किसी के भी हों, यदि जांच में लकड़ी के अवैध परिवहन या तस्करी में उनकी भूमिका सामने आती है, तो वाहन मालिक सहित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि डबरी निर्माण कार्य किस योजना के तहत चल रहा है, उसमें किन वाहनों का इस्तेमाल हो रहा है और लकड़ी के परिवहन का निर्माण कार्य से कोई संबंध है या नहीं।
यदि किसी वन कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, पत्रकारों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश के मामले की भी पुलिस निष्पक्ष जांच करे।
करीब 50 हजार रुपये मासिक वेतन, संपत्ति की जांच की मांग!
मामले के बीच संबंधित प्रभारी डिप्टी की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका मासिक वेतन करीबन 50 हजार रुपये होगा,ऐसे में उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों की जांच की मांग भी उठ रही है।
हालांकि, संपत्ति को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और आय के स्रोतों की जांच जरूरी है। यदि कोई ठोस शिकायत या साक्ष्य सामने आते हैं, तो सक्षम एजेंसी को नियमानुसार जांच करनी चाहिए।
जिले के जिम्मेदार अधिकारी कब लेंगे संज्ञान?
कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में बार-बार सामने आ रहे मामलों के बीच अब जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या अधिकारी ग्राम पतवाही में लकड़ी से भरे ट्रैक्टर के मामले की जांच कराएंगे? क्या JCB और ट्रैक्टर के दस्तावेजों की पड़ताल होगी? क्या लकड़ी के स्रोत और परिवहन की वैधता की पुष्टि की जाएगी? क्या बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई होगी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग के क्षेत्र में यदि लकड़ी का अवैध परिवहन हो रहा था, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
वीडियो में लकड़ी से भरा ट्रैक्टर दिखाई दे रहा है और चालक प्रभारी डिप्टी का नाम लेकर वाहनों को उनका बता रहा है। अब जरूरी है कि इस दावे की दस्तावेजों से पुष्टि हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
ट्रैक्टर और JCB किसी के भी हों, यदि लकड़ी तस्करी में उनकी भूमिका साबित होती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। बिना नंबर प्लेट के वाहनों के इस्तेमाल की भी जांच होनी चाहिए। किसी को भी बचाया नहीं जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि वन विभाग और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जिले के जिम्मेदार अधिकारी कब तक पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाते हैं।
