रायपुर/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर “आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व” विषय पर बौद्धिक विमर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश, उसके आधुनिक संदर्भ और वैश्विक ज्ञान के साथ उसके समन्वय पर विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने कहा कि ‘जन-गण-मन’ केवल राष्ट्रगान नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, दर्शन और अध्यात्म का संक्षिप्त स्वरूप भी है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसमें पश्चिमी राष्ट्रवाद की संकीर्णता के स्थान पर भारत की सर्वसमावेशी आत्मा को अभिव्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इसमें देश को नमन करने के साथ उपनिषद की ‘सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु’ की परंपरा भी दिखाई देती है, जिसका भाव साथ चलने और साथ आगे बढ़ने का है।

विमर्श में डॉ. कपिल देव प्रजापति ने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, समाज सेवा और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था।
प्रो. शैलेंद्र खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा परिस्थितियों के अनुरूप निरंतर विकसित होती रही है। इसलिए प्राचीन ज्ञान को सही संदर्भ और गहराई के साथ समझने के लिए निरंतर अध्ययन और प्रयास आवश्यक हैं।
वहीं डॉ. राजेंद्र मोहंती ने कहा कि शिक्षा को केवल भारतीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय विश्वभर में उपलब्ध श्रेष्ठ ज्ञान को भी शिक्षा नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। डॉ. आशुतोष मंडावी ने कहा कि समय के साथ विलुप्त हो चुके प्राचीन ज्ञान को पुनः खोजने तथा उसे आधुनिक संदर्भों में विकसित करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष श्री पंकज नयन पांडेय ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव सुनील शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेन्द्र शर्मा सहित विभिन्न संकायों के अतिथि प्राध्यापक एवं अन्य उपस्थित रहे।