एमसीबी/छत्तीसगढ़
भखार न्यूज नेटवर्क: एमसीबी/छत्तीसगढ़, 10 अगस्त 2026
एमसीबी जिले का कुंवारपुर वन परिक्षेत्र एक बार फिर कथित अवैध गतिविधियों और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। वन क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन, लकड़ी परिवहन और जंगल की जमीन से जुड़े कथित लेन-देन के मामलों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सद्भाव पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ ने सोमवार, 10 अगस्त को महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर, जिला एमसीबी के माध्यम से शिकायत आवेदन सौंपा।
संघ ने शिकायत में कहा है कि कुंवारपुर वन परिक्षेत्र से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर मीडिया में फोटो, वीडियो एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लगातार खबरें प्रकाशित की गईं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
संबंधित डिप्टी द्वारा खबरों को झूठा बताने के दावे और द्वारा पत्रकारों पर पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं, तो उनके समर्थन में नाम सहित ठोस साक्ष्य और प्रमाण सामने लाए जाएं। और सही पाए जाने पर कार्यवाही की जाए

शिकायत में वन परिक्षेत कुंवारपुर में सामने आए विभिन्न मामलों का उल्लेख करते हुए संबंधित डिप्टी की भूमिका और पूर्व पदस्थापना के दौरान सामने आए कथित विवादों की भी जांच किए जाने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि इन मामलों को लेकर पूर्व में वन मंडलाधिकारी मनेंद्रगढ़ से दूरभाष पर कार्रवाई की मांग की गई थी, साथ ही सबूतों के साथ मीडिया के माध्यम से खबर भी प्रकाशित की गई लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

खबरों को झूठा बताने का दावा, पत्रकारों पर लगाए आरोप—जांच की मांग
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित डिप्टी द्वारा समाचारों एवं सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों को झूठा एवं भ्रामक बताया जा रहा है। साथ ही पत्रकारों पर कथित रूप से पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं।
सद्भाव पत्रकार संघ ने इन आरोपों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लगाए गए आरोपों के पीछे कोई ठोस साक्ष्य है या नहीं।
7 बड़ी मांगों के साथ प्रशासन को घेरा
- अवैध रेत उत्खनन, लकड़ी परिवहन एवं कथित भूमि लेन-देन की उच्चस्तरीय जांच।
- संबंधित डिप्टी की भूमिका एवं विभागीय रिकॉर्ड की जांच।
- मीडिया एवं सोशल मीडिया में सामने आए आरोपों की सत्यता का परीक्षण।
- जांच में दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई।
- पत्रकारों पर लगाए गए आरोपों की भी साक्ष्य सहित जांच।
- आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र अथवा बाहरी एजेंसी से जांच।
- जांच के निष्कर्ष की लिखित जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने की मांग की है।
- 10 दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं तो धरने की चेतावनी
मामले को लेकर सद्भाव पत्रकार संघ ने प्रशासन को 10 दिवस का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में जांच प्रारंभ नहीं की जाती है, तो संघ द्वारा डीएफओ कार्यालय मनेंद्रगढ़ के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।

अब बड़ा सवाल यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर वन विभाग और जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है? क्या कुंवारपुर वन परिक्षेत्र से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होगी? और यदि जांच होती है तो उसकी रिपोर्ट में वास्तविकता क्या सामने आती है—यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल शिकायत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
